उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की जेई भर्ती परीक्षा में करीब 100 ऐसे अभ्यर्थी थे, जिन्होंने तीन घंटे का पेपर एक या सवा घंटे के अंदर पूरा कर दिया था। अभ्यर्थियों के इसी उतावलेपन ने एसटीएफ के लिए सुराग का काम किया। एसटीएफ ने इन सभी को जांच के दायरे में ले लिया और शैक्षिक रिकार्ड खंगाले गए। इसके सहारे एक-एक पर एसटीएफ ने अपनी आंख गड़ानी शुरू कर दी।
दरअसल, 26 हजार अभ्यर्थियों में संदिग्धों को तलाशना एसटीएफ के लिए आसान नहीं था। ऐसे में एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी ने जांच के लिए वैज्ञानिक तकनीक और विश्लेषण का सहारा लिया। सबसे पहले परीक्षा करवाने वाली एजेंसी एपटेक से सभी अभ्यर्थियों का डेटा लिया। किसने कितने समय में परीक्षा पूरी की, कितने सवालों का जवाब दिया, सबसे ज्यादा सही जवाब किसने दिए... इन सभी बिंदुओं पर पड़ताल की गई। डेटा का बेल कर्व, रिग्रेशन तकनीक से विश्लेषण कर संदिग्ध अभ्यर्थियों को छांटा गया। सभी 26000 अभ्यर्थियों के लॉग ट्रेल एपटेक से लेकर उसे कई मापदण्डों पर चेक किया गया।
एक मिनट के सवाल के जवाब तीन सेकंड में दिए
एसटीएफ के संदेह के दायरे में आए अभ्यर्थियों में कई ऐसे हैं, जिन्होंने तीन-तीन सेकंड में सवालों के जवाब दे दिए। अच्छे से अच्छे स्कॉलर के लिए भी एक सवाल को पढ़कर जवाब देने का औसत समय आधे से एक मिनट के बीच आ रहा है। जिन लोगों ने तीन से पांच सेकंड में जवाब दिए, उन सभी के हाईस्कूल व इंटर के रेकॉर्ड जुटाए गए। इसमें वे औसत से भी कम पाए गए। ऐसे सभी संदिग्धों को एसटीएफ अलग करती गई। एसटीएफ के मुताबिक अभी चार अभ्यर्थी गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन इनकी संख्या 10 से ज्यादा हो सकती है।

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